बहुत जरूरी है आंखों की देखभाल

आंखें पूरे शरीर की तुलना में ईश्वर द्वारा दी गई सबसे सुंदर, मनमोहक एवं नाजुक रचना हैं। कवियों, शायरों एवं गजल कहने वालों ने अपनी गजलों और गीतों में आंखों को न जाने क्या-क्या उपमाएं दी हैं। यदि यही आंखें चमकहीन, उनींदी एवं बीमार सी लगने लगें तो इनकी तारीफ कौन करेगा?
यदि हम चाहते हैं कि हमारे नयन सुंदर, स्वस्थ एवं बोलते से दिखें तो इनकी देखभाल पर ध्यान देना होगा।
त सुबह उठकर आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारिए। इससे नेत्रों में ताजगी आती है और थकान मिटती है।
त आंखों को व्यायाम के रूप में अच्छी एवं गहरी नींद दें। प्रतिदिन कम से कम एक बार आंखों को फैलाकर पुतलियों को सीधे एवं उल्टी दिशा में तथा गोलाई में हल्का-हल्के से घुमाएं। इससे आंखों को आराम मिलता है।
त यदि कभी काम की अधिकता के कारण आंखों में जलन एवं थकावट महसूस हो रही हो तो इन्हंे बंद करके गुलाबजल में भीगी रूई इन पर रखें।
त सूर्यग्रहण के समय, अत्यधिक तेज रोशनी में तथा अल्ट्रा वायलेट रोशनी को नंगी आंखों से न देखें। इसके लिये अच्छी किस्म के चश्मों का प्रयोग करें। कभी-कभी तेज रोशनी से आंखों की दृष्टि भी जा सकती है।

त जहां तक हो सके, टेबल पर झुककर तथा बिस्तर पर लेटकर पढ़ाई न करें। इससे आंखों पर तनाव पड़ता है।
त रात को सोने से पूर्व यदि संभव हो तो दृष्टि को कुछ देर आकाश या तारों पर जमा कर रखें। इससे नेत्रों में शीतलता का अहसास होता है।
त आंखों में खानपान के तौर पर पोषण हेतु विटामिन ‘ए’ के साथ ‘बी’, ‘सी’ एवं ‘डी’ का भी सेवन अवश्य करना चाहिए। गाजर, मक्खन, संतरा आदि खूब खाना चाहिए।
त आंखों के स्वास्थ्य की दृष्टि से रोना अच्छी कसरत है। जब आंसू आयें तो खुलकर रो लें। इससे आंखों का मैल प्राकृतिक रूप से साफ होता है।
त अगर इस प्रकार नेत्रों की देखभाल की जाये तो आंखें निश्चित ही सुंदर और स्वस्थ बनी रहेंगी परंतु विशेष दर्द, सूजन या चोट लगने पर देर न करके नेत्रा विशेषज्ञ को शीघ्र दिखाएं।

