पंजाब से 15 हजार किसानों ने किया दिल्ली कूच

अमृतसर, दिल्ली की कई सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन आज 32वां दिन है। सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन सभी बेनतीजा रहीं है। सरकार के वार्ता के नए प्रस्ताव पर किसान संगठन आज फैसला ले सकते हैं। किसान संगठनों ने शुक्रवार को भी इस पर विचार किया था। सरकार को उम्मीद है कि दो-तीन दिनों में किसानों के साथ बातचीत शुरू हो सकती है।
कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में राजस्थान शिक्षक संघ भी शामिल हो चुका है। संगठन के एक प्रतिनिधि ने बताया कि हमारे संगठन ने सरकार के खिलाफ राजस्थान में जगह-जगह प्रदर्शन किए हैं। इन कानूनों का प्रभाव पूरे मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डर पर एक माह से चल रहे किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए शनिवार को 15 हजार किसानों का काफिला पंजाब के संगरूर के खनौरी बॉर्डर से रवाना हुआ। 27 दिसंबर को डबवाली बॉर्डर से 15 हजार किसान दिल्ली में प्रवेश करेंगे।
केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डर पर एक माह से चल रहे किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए शनिवार को 15 हजार किसानों का काफिला पंजाब के संगरूर के खनौरी बॉर्डर से रवाना हुआ। 27 दिसंबर को डबवाली बॉर्डर से 15 हजार किसान दिल्ली में प्रवेश करेंगे।
यूपी गेट पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सभी तरफ से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी है। अब किसान केवल एम्बुलेंस को ही आने-जाने की इजाजत दे रहे हैं। बुराड़ी स्थित समागम मैदान में प्रदर्शन कर रहे एक किसान ने कहा कि आज किसानों का विरोध शुरू हुए एक महीना पूरा हो गया है। सरकार को तीनों कानूनों को निरस्त कर देना चाहिए। जैसे ही कानून वापस लिए जाते हैं, हम अपने घरों को लौट जाएंगे।
कृषि कानूनों के खिलाफ टिकरी बॉर्डर (दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर) पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि जब तक कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाता तब तक हम यहीं बैठे रहेंगे। चाहें एक साल या उससे अधिक समय लग जाएं।। कृषि कानूनों के खिलाफ बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में किसान अभी भी डटे हुए हैं। सिंघु बॉर्डर से एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि मोदी सरकार से विनती है कि ये तीनों काले कानूनों को रद्द करें। जो लोग हमें आतंकवादी कह रहे हैं हम आतंकवादी नहीं हैं..।

