Covid-19 डर लगता है सरकारी हस्पताल जाने से?

भारत में मिले कोरोना वायरस के नये स्ट्रेन ने जहां हाहाकार मचा रखी है वहीं इसका प्रसार जिस तेजी से हो रहा है वह एक चिंता का विषय है। हर रोज मिलने वाले नये पाजिटिव इस चिंता को ओर बढ़ा रहे हैं क्योंकि जहां देश में आक्सीजन से लेकर दवाईयों तक की किल्लत महसूस की जा रही है वहीं लोगों द्वारा इस वायरस को हल्के में लेने से यह वायरस दिनों दिन गम्भीर रूप धारण कर रहा है जिससे भारत के हस्पतालों पर भी दबाव साफ महसूस किया जा सकता है।
बड़े महानगरों में खराब स्थिति
बड़े महानगरों में तो स्थिति ओर भी भयानक दिखाई दे रही है जहां से हर रोज मिलने वाली सूचनायें दिल दहलाने के लिये काफी हैं। बिना आक्सीजन के काल के मुंह में जा रहे लोग, बिना ईलाज के घर पर ही अपना ईलाज करने की मजबूरी।
उम्मीद की किरण वैक्सीन

जब महामारी इतना भयंकर रूप धारण कर चुकी है तो लोगों के लिये अंधेरे में उम्मीद की एक किरण बनकर आई कोविड Vaccine संबंधी एक खबर कि अब यह वैक्सीन 1 मई से 18 वर्ष से ऊपर के लोगों को भी दी जायेगी, लेकिन… भारतीय राजनीति कहें यां अदूरदर्शिता कि 1 मई से पंजाब सहित कई राज्यों में यह Vaccine देने का अभियान शुरू नहीं हो सका। दुखदायी बात तो यह रही कि प्राईवेट हस्पतालों ने Vaccine लगानी बंद कर दी है। उनका तर्क है कि वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं हो रही। रही बात सरकारी हस्पतालों की Civil Hospital Bathinda तो वहां पर भी 18 वर्ष से उपर आयु वर्ग के लिये वैक्सीन अभी तक उपलब्ध नहीं है। इसके अतिरिक्त 45 वर्ष से ज्यादा वाले लोग जो पहली बार वैक्सीन लेने आ रहे हैं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
समझदार हो गया है कोविड-19 वायरस?

बठिंडा के सरकारी हस्पताल में व्यवस्था का इतना बुरा हाल है कि अगर कोई स्वास्थ्य व्यक्ति भी हस्पताल में Vaccine लेने जाये तो संभव है कि कोरोना की चपेट में आ जाये। Civil Hospital Bathinda के अधिकारी यह मान कर चल रहे हैं कि कोरोना का वायरस खतरनाक होने के साथ-साथ समझदार भी हो गया है। बीमार या संभावित रोगियों की जांच करने वाला सैंटर (फ्लू कार्नर) व वैक्सीन हेतु जाने वाले लोगों के लिये रखा गया रास्ता लगभग एक ही है फर्क सिर्फ इतना है कि दोनों को अलग करने के लिये (संभावित रोगियों व वैक्सीन लेने जाने वाले लोगों के बीच में) प्रशासन ने लोहे की 3 फुट लम्बी एक ग्रिल रख दी है। शायद अधिकारी यह समझ रहे हैं कि संभावित रोगियों के खांसने व लगी भीड़ के बीच से कोरोना का वायरस ग्रिल के दूसरी तरफ नहीं जा सकता।

